🌹 रंगों के त्योहार का🌹
मंजरियों ने आम्रकुंज में,रचा दृश्य श्रृंगार का,
मिला निमंत्रण हर पंछी को,रंगों के त्योहार का।
आओ खुलकर खेलो-खाओ।
अन्तर्मन से गले लगाओ।
भावों की रूठी कलियों को,
चूम-चूम कर आज मनाओ।
सदियों से ही रहा हमेशा,ऋतु बसंत मनुहार का,
मिला निमंत्रण गली-गली को, रंगों के त्योहार का।
कोयल कूकी पंचम स्वर में।
बजी बंशिका कान्हा कर में।
फागुन के आने से अनगिन,
खुशियाँ चहकीं सबके घर में।
साजन के आने की चाहत,सांकल खोले द्वार का,
मिला निमंत्रण गली-गली को, रंगों के त्योहार का।
होली खेले मीरा मन में।
राधा कान्हा के आंगन में!
गोप- गोपियाँ धूम मचाये,
पिचकारी लेकर मधुवन में।
सब पर चढ़ा हुआ हो जैसे, नशा कृष्ण के प्यार का,
मिला निमंत्रण गली-गली को,रंगों के त्योहार का।
लाल, गुलाबी, नीले, पीले।
वस्त्र हुए सब गीले-गीले।
सबके सब अब एक हो गये,
चाहे हों जितने चमकीले।
मिलन पर्व का अर्थ यही है,फ़र्क मिटे संसार का,
मिला निमंत्रण गली-गली को, रंगों के त्योहार का।
-डाॅ०मधुसूदन साहा,
राउरकेला,ओड़िशा