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शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

डॉ श्याम मनोहर सीरोठिया जी के गीत प्रस्तुति वागर्थ ब्लॉग



       डॉ श्याम मनोहर सीरोठिया 

गीत

तुमसे खुशियाँ कह दूँगा सब, 
दर्द नहीं मैं कह पाऊँगा
हृदय तुम्हारा व्यथित हुआ तो, 
कभी नहीं यह सह पाऊँगा।।


तुम्हीं दृष्टि का सम्मोहन हो,
अनुरागी प्रेमाकुल मन हो।
प्रणय-गंध से सुरभित है जो,
उर का मधुमासी उपवन हो।
बिना तुम्हारे प्राण-प्रिये मैं,
प्राण हीन क्या रह पाऊँगा ।।


तुम्हीं चेतना और ज्ञान  हो,
मुग्ध हृदय का मधुर गान हो। 
मन के प्रिय एकांत क्षणों में,
मदिर कल्पना विनय ध्यान हो।
रह लूंगा मैं सजल नयन में,
नहीं अश्रु में बह पाऊँगा ।।


तुम आभासित हो कण-कण में,
प्रियता के चिर आकर्षण में।
अभिसारी अनुभूत तृप्ति-सी,
बाहुपाश के मधु-अर्पण में।
अपनी प्रेम कहानी को मैं, 
क्या सुधियों में गह पाऊँगा।।

तुमसे खुशियाँ कह दूँगा सब,
दर्द नहीं मैं कह पाऊँगा।
हृदय तुम्हारा व्यथित हुआ तो,
कभी नहीं यह सह पाऊँगा।

दो



गुलमोहर जैसे गालों पर, 
अधरों के भौरों के चुंबन ।
देहयष्टि की लतिकाओं पर,
झूम रहे नयनों के खंजन।।

प्रियता की वासंती खुशबू,
साँस-साँस में बसी तुम्हारी।
मगर मिलन की अभिलाषा पर,
लाज हुई चुपके से भारी।
खंडित करते हुए मौन व्रत,
बोल गए अनुरागी कंगन।।

तुम विभावरी के आँगन में,
दूध नहाई हुई जुन्हाई।
कभी स्वर्णरेखा के तट पर,
रुचिर भोर की हो पहुनाई।
कभी दूर दिखती तुम ऐसी,
धरा-गगन का ज्यों आलिंगन।।

तुमने प्रेम लिखा गीतों में,
मैने हर पल प्रेम जिया है।
प्रेम मुझे पूजा-अर्चन-सा
पुण्य तुम्हारे नाम किया है।।
मन के द्वारे दीप सगुन का,
झंझावत का सहता कंपन ।।


गुलमोहर जैसे गालों पर, 
अधरों के भौरों के चुंबन ।
देहयष्टि की लतिकाओं पर,
झूम रहे नयनों के खंजन।।

तीन

मेरे मन के भोजपत्र पर,
अनुबंधों की तुम पाती हो।
साँसों की सरगम पर प्रतिपल,
गीत प्रणय के तुम गाती हो।।

मेरे सब अवगुण विस्मृत कर,
तुमने सदा मुझे अपनाया।
निर्मल नेह तुम्हारा पावन,
जीवन मेरा सुभग बनाया।
त्याग, तपस्या, करुणा के तट,
तुम जलती संझा-बाती हो।।

मेरे  उर में आग प्रेम की,
तुम शीतल मलयागिरि चंदन।
तुम हो किसी देवकन्या -सी,
मैं हूँ साधारण - सा - वंदन।
तुम खुद अपने मन से पूछो,
मुझे प्राण जैसी भाती हो।।

वचन, कर्म, मन से जीवन में,
कभी तुम्हें अर्पित हो पाउँ।
जीवन धन्य-धन्य हो जाए,
मैं तुममें मुखरित हो जाऊँ।
मेरी सभी प्रार्थनाओं के,
विश्वासों की तुम थाती हो।।

अपनेपन का सघन मेह तुम,
बूँद-बूँद से प्यार छलकता।
मैं हूँ प्यासा जन्म-जन्म का,
मरुथल मेरे अधर झलकता।
अर्थहीन मैं, तुम समर्थ हो, 
बनकर तुम संबल आती हो।।

मेरे मन के भोजपत्र पर,
अनुबंधों की तुम पाती हो।
साँसों की सरगम पर प्रतिपल,
गीत प्रणय के तुम गाती हो।।

चार

नेह बरसता रहे निरंतर,
खिली रहे जीवन फुलवारी।
साँस - साँस में रहे महकती, 
कस्तूरी - सी गंध तुम्हारी।।

विद्यापति की सुघड़- नायिका-
देहयष्टि में दिखे तुम्हारी।
कभी महादेवी की करुणा,
कभी सूर-तुलसी - शुभकारी ।
रमी श्याम में तुम मीरा-सी ,
तुम कनु-प्रिया दिव्य-ब्रज-नारी।।

कोमलकांत छंद से मुख पर,
चपल-व्यंजना जैसी चितवन।
संयम छोड़ रीझ जाता है,
लज्जाशील कलाओं पर मन।
मादकता के महायज्ञ में,
समिधा जैसी प्रीति हमारी।।

रूप-राशि की सरिता के तट,
प्रणय-साधना हृदय कर रहा।
तृषा-कंठगत है चातक के,
युगों-युगों से मेघ झर रहा।
सगुन-पत्रिका में मिलने की,
लग्न ढूँढता प्रेम-पुजारी ।।

नेह बरसता रहे निरंतर,
खिली रहे जीवन फुलवारी।
साँस-साँस में रहे महकती, 
कस्तूरी-सी गंध तुम्हारी।।

पाँच

माँगता उर तृप्ति का कीलाल रस-कण,फूल-सी मुस्कान अधरों पर सजाओ।
नेह की कवितावली का मान रखने,
एक रिश्ता ही बचा उसको निभाओ।


बैठकर सुधियों के सूने खंडहर में,
मौन की भाषा सजग सुनते रहे हम।
चेतना विश्वास की घायल हुई पर,
छंद में मन की व्यथा बुनते रहे हम।
कामना की वल्लरी मुरझा न जाए,
गीत कोई प्रीति का नव गुनगुनाओ।।

एक नीरवता लिए अंतस विकल हो,
साँस में गूँजे प्रणय की रागिनी जब।
गंध महके फिर हवाओं में मिलन की,
क्यों विहँसती है विरह की यामिनी तब।
छुप रहा अभिसार हतभागी तिमिर में,
द्वार मन के आस का दीपक जलाओ।।

आ गई है पीर उर के राजपथ तक,
साधना में लीन पर संवेदनाएँ।
कोर नयनों की समेटे हैं जलधि को,
नित्य अवगाहन करें श्यामल-घटाएँ।
कंठगत हैं प्राण चातक के तृषा से,
स्वाति के पीयूषधर्मी मेह लाओ।।

माँगता उर तृप्ति का कीलाल रस-कण,फूल-सी मुस्कान अधरों पर सजाओ।
नेह की कवितावली का मान रखने,
एक रिश्ता ही बचा उसको निभाओ।।

छह

अधर पर आग लिख देना

 नयन में नीर लिख देना, 
अधर पर आग लिख देना।
कलम से इस हथेली पर, 
समर्पण-त्याग लिख देना।।

तुम्हारी प्रीति का हमने, 
नया मंदिर बनाया है।
दरश की आस का दीपक,
सगुन के क्षण जलाया है।
सफल हो साधना मन की, 
मधुर अनुराग लिख देना।।

प्रणय की देहरी पर है,
सिमटती देह चंदन-सी।
नहीं मन मानता कोई,              
विवशता आज बंधन की।
मिलन के नाम मधुमासी, 
महकता बाग लिख देना।।

हृदय का चाँद तुम ले लो,
खुशी की चाँदनी ले लो।
कसकती साँस की वीणा,
मचलती रागिनी ले लो।
हमें विश्वास के उर से, 
निकलता राग लिख देना।।

नयन में नीर लिख देना, 
अधर पर आग लिख देना।
कलम से इस हथेली पर, 
समर्पण-त्याग लिख देना।।

डॉ श्याम मनोहर सीरोठिया

परिचय
नाम --डॉ श्याम मनोहर सीरोठिया
आत्मज-स्व,श्रीमती गंगा देवी ,
स्व श्री रघुनन्दन लाल जी सीरोठिया

जन्मतिथि --28/09/1950
जन्मस्थान-ग्राम बलेह,जिला सागर (म्,प्र)
शिक्षा--एम .बी .बी .एस.
(शासकीय मेडिकल कालेज जबलपुर)
एम.ए.(हिंदी)डॉ हरि सिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर
आपके 27 काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।
डॉ सीरोठिया के एक साथ 09 काव्य संग्रहों का विमोचन हुआ जो हिंदी साहित्य में एक कीर्तिमान है 
डॉ सीरोठिया को पूरे देश में  लगभग 300 साहित्यिक सम्मान प्राप्त हो चुके है
जिनमें  वर्ष 2025 का सरस्वती वाचनालय एवं पुस्तकालय सागर का एक लाख रुपए का साहित्य सरस्वती सम्मान उल्लेखनीय है।
कादंबरी जबलपुर का सर्वोच्च संस्कृति भूषण सम्मान 11000 रुपए,
संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश शासन का 25000 का पद्माकर अलंकरण सम्मान,
तमिलनाडु साहित्य अकादमी चेन्नई का 21000 का साहित्य सेवी सम्मान।
इसके अतिरिक्त देश के चार राज्यपालों एवं 2 मुख्यमंत्रियों द्वारा आपको साहित्य सेवा के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
अप्रैल 2025 में 
डॉ सीरोठिया के एक साथ 09 काव्य संग्रहों का विमोचन होने का अनुपम कीर्तिमान है

पद्मश्री पी सी धवन स्मृति सर्वश्रेष्ठ हिंदी कवि सम्मान चेन्नई 2002

भारतीय भाषा संरक्षा सम्मान साहित्य मंडल श्रीनाथद्वारा राजस्थान 2003 मान नीय श्री भगवती प्रसाद  देवपुरा जी द्वारा 

*क्योंकि यह है हास्यकवि मुकाबला विजेता सम्मान ज़ी स्माइल टी ,वी चेनल मुम्बई2005*

*विशिष्ट साहित्य साधना*
*सम्मान अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन भोपाल 2005 महामहिम राज्यपाल श्री बलराम जाखड़ जी  द्वारा*

*सारस्वत सम्मान हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग इलाहाबाद 2006*
मूलाराम जी जोशी द्वारा 

*राज्य स्वास्थ्य  पुरुस्कार* *सम्मान2007* *भोपाल*
*मान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी द्वारा*

*उत्कृष्ट शासकीय सेवा सम्मान मान  प्रभारी मंत्री  द्वारा 2010*

*तुलसी सम्मान ,2011 तुलसी साहित्य अकादमी भोपाल*

*भारत गौरव सम्मान2012 तक्षशिला विश्वविद्यालय भागलपुर बिहार* 


*डॉ आर.ए.भागवत समाजसेवी चिकित्सक सम्मान20013 इंदौर मान मार्कण्डेय काटजू न्यायमूर्ति सुप्रीम कोर्ट* द्वारा 

*स्व विजयशंकर उपाध्याय स्मृति अखिल भारतीय कादम्बरी दोहा सम्मान जबलपुर  2013

*अखिल भारतीय भारतेंदु हरिश्चंद्र  गीत सम्मान 2014 कोटा (राजस्थान)*

*साहित्य सेवी सम्मान चेन्नई 2014 महामहिम राज्यपाल पांडुचेरीश्री विनय कटियार जी द्वारा तमिलनाडु साहित्य अकादमी चेन्नई*

*स्व दीनानाथ कौल "नादिम" स्मृति शारदा सम्मान श्रीनगर (जम्मू कश्मीर) महामहिम राज्यपाल श्री एन एन वोहरा द्वारा 2015*

*साहित्य सेवी सम्मान 2015*, *तमिलनाडु साहित्य अकादमी चेन्नई महामहिम राज्यपाल पश्चिम बंगाल डॉ केशरीनाथ त्रिपाठी जी द्वारा*


 *आई एम ए*
*लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड*
 आई. एम. ए.म्,प्र शाखा 
*2016 इंदौर*


हरिओम शरण चौबे गीतकार सम्मान 2018 मध्य प्रदेश लेखक संघ का सम्मान भोपाल 

साहित्य सुधाकर गीतकार सम्मान 2019 शील साहित्य परिषद एवं सजल सर्जना समिति जांजगीर (छ, ग)

काव्य कोविद साहित्य श्री गीतकार सम्मान 2019 काव्य धारा हैदराबाद

सजल सेवा रत्न साहित्य सम्मान 2019 मथुरा सजल सर्जना समिति मथुरा (उ प्र)
राष्ट्रीय साहित्य अकादमी पोर्टब्लेयर(अंडमान निकोबार) द्वारा श्रेष्ठ गीतकार सम्मान नव 2019
भोलानाथ गहमरी गीत गौरव सम्मान 
वर्ष 2019 गहमर गाजीपुर (उ प्र)
साहित्य श्री सम्मान
युगधारा फाउंडेशन वर्ष 2019 लखनऊ(उ,प्र)
हिंदी साहित्य सेवा रत्न
सम्मान 2020 वातायन साहित्य परिषद उमरिया म,प्र
अंबिका प्रसाद दिव्य स्मृति राष्ट्रीय  सम्मान वर्ष  2020
गीत संग्रह सुधियों का आँचल के लिए
मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग
द्वारा
महाकवि पद्माकर अलंकरण सम्मान 2021 विधायक सागर शैलेन्द्र जैन एवं श्री विकास दवे निर्देशक संस्कृति परिषद मध्यप्रदेश शासन भोपाल 
इस अवसर पर आपको 
गीत ऋषि अलंकरण से विभूषित किया गया ।
साहित्य सेवी सम्मान 2022
वाणी साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था मुज्जफरनगर (उ.प्र.)
समग्र लेखन पर स्व पांडुरंग पिंजरकर स्मृति संस्कृति
भूषण सम्मान 2022 कादम्बरी का अलंकरण जबलपुर
स्व.हरिवल्लभ सिलाकारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मृति साहित्य सृजन सम्मान 2023  जय जनतंत्र समाचार पत्र द्वारा पूर्व सांसद श्री लक्ष्मीनारायण यादव द्वारा सागर 
अभिनव शब्द शिल्पी सम्मान 2025 अभिनव कला परिषद भोपाल पूर्व सांसद श्री रघुनंदन शर्मा एवं पूर्व विधायक रामेश्वर शर्मा द्वारा
राष्ट्रीय साहित्य सरस्वती सम्मान (एक लाख रूपये) 2025 श्री सरस्वती वाचनालाय एवं पुस्तकालय सागर, पूर्व सांसद श्री लक्ष्मीनारायण यादव एवं कुलपति रानी अवंति बाई लोधी वि. वि. सागर डॉ विनोद मिश्रा द्वारा
इसके अतिरिक्त शताधिक अन्य सम्मान
संप्रति 
पूर्व निर्विरोध प्रदेश अध्यक्ष म.प्र.आई. एम.ए. 2006-2007
राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य ,नेशनल आई. एम. ए. नई दिल्ली के 21 वर्षों से सदस्य हैं।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी सागर (से,नि.)