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गुरुवार, 2 जुलाई 2026

साहित्य समाचार : प्रस्तुति वागर्थ ब्लॉग


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रपट साभार 
वरिष्ठ पत्रकार जगत शर्मा जी

अपने नाम विकास को सार्थक करते हैं बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ.विकास दवे - रघुनंदन शर्मा 

आदित्य संस्कृति पत्रिका के साहित्यकार डॉ.विकास दवे विशेषांक का लोकार्पण संपन्न

भोपाल | ' नाम का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है जैसे विकास नाम को सार्थक करते हैं बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ.विकास दवे वे एक अच्छे, संगठक आयोजन संपादक साहित्यकार मार्गदर्शक और सबको साथ लेकर चलने वाले अच्छे मित्र हैं | ' यह उदगार हैं पूर्व सांसद और मानस भवन के संचालक श्री रघुनंदन शर्मा के जो दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय सभागार में  ' आदित्य संस्कृति ' मासिक पत्रिका के साहित्यकार डॉ.विकास दवे विशेषांक का लोकार्पण करते हुए बोल रहे थे। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया, तत्पश्चात डॉ प्रतिभा द्विवेदी ने मां सरस्वती की वंदना की | आदित्य संस्कृति पत्रिका एवं संदर्भ प्रकाशन भोपाल द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मंचस्थ अतिथियों का स्वागत पुष्पहार और अंग वस्त्र ओढ़ाकर कर राकेश सिंह ने किया , तत्पश्चात पत्रिका के संपादक श्री भानु शर्मा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए पत्रिका के उद्देश्य और अभी तक की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि आदित्य संस्कृति पत्रिका की यात्रा पिछले सात सालों से अनवरत जारी है। कोरोना काल में जब अन्य बड़ी बड़ी पत्रिकाओं पर संकट आया और वह बंद हो गई लेकिन आदित्य संस्कृति तब भी प्रकाशित होती रही। आज पत्रिका सबसे अधिक पूर्वोत्तर राज्यों और दिल्ली एनसीआर में लोकप्रिय है। डॉ विकास दवे जी पर विशेषांक प्रकाशित करना पत्रिका की यात्रा में एक विशेष उपलब्धि के रूप में हमेशा गिना जाएगा। कार्यक्रम का सुरुचिपूर्ण संचालन वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार श्री जगत शर्मा ने किया | इस अवसर पर पत्रिका पर समीक्षात्मक टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार घनश्याम मैथिल अमृत ने कहा कि -' यह विशेषांक डॉ.विकास दवे की व्यक्तित्व एवं कृतित्व के कई अनछुए पहलुओं को पाठकों के सामने प्रकट करता है |' लघुकथा शोध केंद्र की निदेशक श्रीमती कांता रॉय ने विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि -' डॉ.विकास दवे के जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है उनकी राष्ट्र बोध की चेतना और सभी के प्रति समभाव की भावना अनुकरणीय है | ' उर्दू अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद की निदेशक डॉ.नुसरत मेहदी ने कहा -' डॉ.दवे हम सबके मार्गदर्शक हैं वे कभी किन्हीं परिस्थिति में भी विचलित नहीं होते वे सदा सहज रहते हैं सदा मुस्कराते रहना उनके व्यक्तित्व की बड़ी विशेषता है| ' इसके साथ ही ' गीत गागर ' पत्रिका के संपादक वरिष्ठ गीतकार श्री दिनेश प्रभात ने कहा की -' डॉ.विकास दवे की उपस्थिति ही किसी आयोजन को भव्यता प्रदान करती है उनका सकारात्मक ऊर्जा से भरा व्यक्तित्व सबके लिए प्रेरणा पुंज है |' आयोजन में वरिष्ठ रंगकर्मी और ख्यात अभिनेता संजय मेहता ने भी डॉ.विकास दवे के व्यक्तित्व पर अपने विचार रखे |इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एवं निदेशक मुक्तिबोध सृजन पीठ ने कहा कि -' शब्द ही हमारे मित्र शब्द ही हमारे शत्रु होते हैं इसलिए शब्दों का हमें बड़े सोच समझ के प्रयोग करना चाहिए,साहित्यकार शस्त्र और शास्त्र दोनों धारण करने वाला हो , डॉ.विकास दवे ने प्रदेश ने अकादमी के निदेशक के रूप में   उल्लेखनीय कार्य किए हैं आदित्य संस्कृति ने उन पर केंद्रित विशेषांक निकाल कर महत्वपूर्ण कार्य किया है | ' कार्यक्रम के अंत में संयोजक पत्रकार श्री जगत शर्मा ने सभी का आभार प्रकट किया | इस आयोजन में श्रीमती सुनीता दवे,डॉ.संजय सक्सेना ,रामराव वामनकर,करुणा राजुरकर, कर्नल डॉ.गिरजेश सक्सेना,गोकुल सोनी, डॉ मोहन तिवारी आनंद,मनोज जैन मधुर, सुनील चतुर्वेदी, श्रीमती साधना गंगराड़े, श्रीमती सीमा शर्मा, हरिवल्लभ शर्मा , हरिओम श्रीवास्तव,जगदीश कौशल, डॉ.वीणा सिन्हा ललित व्यास,चित्रांश खरे, कपिल भार्गव,संजय पथोडकर,राजकुमार बरूआ सहित नगर के अनेक महत्वपूर्ण साहित्यकार उपस्थित थे |

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