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गुरुवार, 2 जुलाई 2026

आदरणीय राजा अवस्थी जी के दो नवगीत प्रस्तुति ब्लॉग वागर्थ

              राजा अवस्थी जी              

नवगीत -1.   

   बहुत सुविधाएँ जुटा ली


जिन्दगी ने बहुत सुविधाएँ जुटा ली।

फटे जूते अंगौछे बिन खेत पर होंगे पिताजी 
मुरहरे में दाल अम्मा पकाती होंगी; 
हर सुबह दोपहर संध्या कोख जाये को सुमिरती यशोदा की रीति, गाती-निभाती होगी;

नहीं छूटी पिताजी की भी कुदाली।

एक तन पर शव बहुत हैं शहर है, उत्सव बहुत हैं ओढ़ना, खाना, पहनना, जर जुटाना है; 
अहर्निश ये व्यस्तताएँ, मिटाती संवेदनाएँ 
बहुत थोड़ा पा, बहुत कुछ भूल जाना है;

लोग अपने, जब मिले नजरें झुका लीं।

अब कहाँ घर-द्वार-आँगन, वहाँ की किलकारियाँ 
शहर में बस एक कमरा चीखता है; 
कहाँ दुलराना सुलाना, लोरियाँ गाना सुनाना
खीझती माँ, तनावों का घर पिता है;

यंत्रणा की नदी में क्यों नाव डाली
नवगीत -2.

 आ बैठें साथ कुछ तेरी, 
कुछ मेरी, हो जाए बात, 
आ बैठें साथ।

कितने दिन से बीड़ी-साथ नहीं पी;
बंद पड़ीं सुख-दुख की मन में सीपी;
अनुभव का सारा ही खारा गुजरात, 
आ बैठें साथ।

मालुम भी हैं कुछ घर-गाँव के हाल; 
सुनते हैं लड़कों ने बदली है चाल;
गाली मुँह में बसती छुरियों पर हाथ,
आ बैठें साथ।

संबंधों का संगम लुप्त हो चला; 
वैयक्तिकता में सौहार्द खो चला;
घर का घरवालों को हाल नहीं ज्ञात, 
आ बैठें साथ।

राजा अवस्थी 
गाटर घाट रोड, आजाद चौक 
कटनी - 483501(मध्यप्रदेश)
मोबा. 9131675401


परिचय
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     परिचय -
नाम - राजा अवस्थी
शिक्षा - परास्नातक (हिन्दी साहित्य), शिक्षा  
           स्नातक
व्यवसाय - मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग में अध्यापन 
सम्प्रति - प्रधानाध्यापक, सांदीपनि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, झिंझरी ,कटनी 

लेखन - नवगीत एवं अन्य काव्य विधाओं के साथ 
            आलोचना-आलेख।

प्रकाशन -(1) 'जिस जगह यह नाव है' (नवगीत  
              कविता संग्रह) का अनुभव प्रकाशन, 
              गाजियाबाद से प्रकाशन सन् 2006 एवं
     (2) 'जीवन का गुणा-भाग' (नवगीत कविता 
            संग्रह) श्वेतवर्णा प्रकाशन, नोयडा, 
             प्रकाशन वर्ष - 2021
(3)कैकेयी अब बोलती (लम्बी कविता)
(4)आलोचना का ब्राह्मणवाद (आलोचना)
(5) 'समकालीन हिंदी ग़ज़ल - पांँच दशक: पाँच कदम' (संपादन)

   * विश्व हिन्दी साहित्य में राम कथा के सर्वथा   
      उपेक्षित पात्र कैकेयी पर केन्द्रित विशिष्ट काव्य 
     "कैकेयी अब बोलती" का सृजन विशेष रूप से 
      उल्लेखनीय।

   * साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित 'समकालीन  
      नवगीत संचयन' एवं डॉ ओमप्रकाश सिंह द्वारा संपादित 'नई सदी के नवगीत' में प्रमुख कवि के रूप में शामिल किए जाने के साथ शिवानंद सहयोगी जी के द्वारा संपादित ग्रंथ 'नवगीत अर्धशतक' एवं लगभग सभी महत्वपूर्ण समवेत नवगीत संकलन यथा -  
      नवगीत नई दस्तकें (संपादक - डाॅ. निर्मल 
      शुक्ल), गीत वसुधा (संपादक - नचिकेता),    
      समकालीन नवगीत कोश (संपादक     
     -नचिकेता), नवगीत के नये प्रतिमान, नवगीत 
      का लोकधर्मी सौंदर्यबोध, नवगीत का 
      मानवतावाद (संपादक - डाॅ राधेश्याम बंधु), 
      सहयात्री समय के (संपादक - डाॅ. रणजीत 
      पटेल), नई सदी के स्वर, भाग -5 (संपादक -  
      हीरालाल मिश्र 'मधुकर') सहित कई और   
      समवेत संकलनों एवं नवगीत विशेषांकों में  
       नवगीत संकलित।
      नवगीत एवं हिन्दी ग़ज़ल आलोचना पर केंद्रित  
      कुछ पुस्तकों में लेख शामिल

   * सन् 1986 से पत्र - पत्रिकाओं में कविताओं    
      एवं आलेखों का प्रकाशन

   * आकाशवाणी जबलपुर, शहडोल एवं दूरदर्शन   
      केन्द्र भोपाल के साथ स्थानीय चैनलों पर 
      कविताओं का प्रसारण


  * सम्मान - * कादम्बरी साहित्य परिषद जबलपुर का अखिल भारतीय नवगीत सम्मान - निमेष सम्मान 2006(नवगीत संग्रह जिस जगह यह नाव है 'के लिये),
* बैसवारा शोध संस्थान लालगंज, रायबरेली का नवगीत गौरव सम्मान-2018,
* प्रतिष्ठित किस्सा-कोताह नवगीत सम्मान 2020,
* साकीबा, विदिशा - भोपाल का नवकृति सम्मान 2021,इनके अतिरिक्त और भी कई संस्थाओं द्वारा सम्मान।
विशेष - यूट्यूब पर 'नवगीत धारा' श्रृंखला अंतर्गत नवगीत पर चर्चा एवं कालजयी कहानियाँ श्रृंखला के अन्तर्गत कहानी-पाठ-प्रस्तुति
ADDE KI BAAT यूट्यूब चैनल पर विविध साहित्यिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति 

सम्पर्क -
गाटरघाट रोड, आजाद चौक, कटनी
483501, मध्यप्रदेश
मोबा 9131675401
Email - raja.awasthi52@gmail.com

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