हरिनारायण सिंह 'हरि ' जी के दो नवगीत
( एक )
दीखता धुँधला भविष्यत् आँख पर जाले हुए
भीष्म हम हैं, द्रोण हम हैं , मौनव्रत पाले हुए
सूक्ति दिनकर की हमें कब याद रहती है सखे
द्रौपदी की साड़ियाँ फरियाद करतीं जब सखे
हैं हमारे चोर मन तो स्वार्थ के घाले हुए
भीष्म हम हैं, द्रोण हम हैं , मौनव्रत पाले हुए
पांडवों के गुण न दिखते कौरवों की गिनतियाँ
हम नहीं सुन पा रहे हैं आर्त्तजन की विनतियाँ
राज्य आधे दूर, गउवें पाँच के लाले हुए
भीष्म हम हैं, द्रोण हम हैं , मौनव्रत पाले हुए
नीति-निर्धारक-नियंता इस कदर गिर जायँगे
जंग की ज्वाला उठेगी , अन्ततः जल जायँगे
क्या बतावें साफ कुरते इस कदर काले हुए
भीष्म हम हैं, द्रोण हम हैं , मौनव्रत पाले हुए
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( दो )
पेड़ लगाया, किन्तु नहीं फल उसमें है दिखता
भाग्य जनक का फीका-फीका यही भाग्य लिखता
फले-फुले यह पेड़ अबाधित, अपने को झोंका
शीतलता के बदले तन पर बड़ा-बड़ा फोंका
पता नहीं था बिना मोल के पिता यहाँ बिकता
भट्ठी हुई आज की दुनिया सिर्फ जहाँ तपना
अब आयेंगे, अब आयेंगे अच्छे दिन जपना
ऐसे में क्या करे, गयी मृगतृष्णा भी उकता
पूँजी सारी चली गयी इक महल बनाने में
लेकिन सुख तो पड़ा रहा उसके तहखाने में
फिसलन भरे फर्श पर आखिर वह कैसे टिकता
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हरिनारायण सिंह 'हरि' : संक्षिप्त परिचय
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• मूल नाम- हरिनारायण सिंह
• जन्म- 2 जनवरी,1958 ई
• शिक्षा- एम. ए (राजनीति विज्ञान)
• केएसएस काॅलेज,मोहिउद्दीन (समस्तीपुर) के राजनीति विभागाध्यक्ष पद से अवकाशप्राप्त।
•लेखन- हिन्दी व बज्जिका में।
• प्रकाशन- तीन प्रबंधकाव्य, पाँच कविता-संग्रह, 6 गीत-नवगीत संग्रह, एक गजल-संग्रह, एक दोहा संग्रह, एक लघुकथा संग्रह और एक समीक्षा की पुस्तक प्रकाशित। एक कविता संकलन और एक लघुकथा संकलन का सम्पादन। कई पत्रिकाओं व स्मारिकाओं का संपादन ।
प्रसारण- आकाशवाणी के पटना व दरभंगा तथा दूरदर्शन के पटना व मुजफ्फरपुर केन्द्र से प्रसारण।
• मूल्यांकन-पुस्तक- डाॅ नीरज कुमार सिन्हा द्वारा संपादित मूल्यांकन-पुस्तक 'हरिनारायण सिंह हरि का गीत-काव्य' प्रकाशित।
•पता- हरिद्वार भवन,राजपुर-जौनापुर
पो-जौनापुर,
भाया-मोहिउद्दीन नगर
जिला-समस्तीपुर-848501
मोबाइल नंबर-9771984355
•ई-मेल - hindustanmohanpur@gmail.com
हार्दिक आभार, वागर्थ!
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