शुक्रवार, 3 सितंबर 2021

दो बाल गीत

मेहा मिश्रा 
              के
                  दो बालगीत
    
                          प्रतिभाशालिनी कवयित्री मेहा मिश्रा जी जमशेदपुर से हैं और छंदोबद्ध रचनाओं में खासी पकड़ रखती हैं। वागर्थ मेहा मिश्रा जी का बहुत आभार व्यक्त करता है।


प्रस्तुति
वागर्थ

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सो जा बिटिया रानी सो जा, सपनों के बुन धागे।
तारे सोए चंदा ऊँघे, क्यों तू प्यारी जागे।।

सोया आँगन, सोई तुलसी, गलियाँ सोईं सारी।
सोया बनिया सोया पंडित, सोया देख भिखारी।
सोया बंदर, सोया भालू , सोया हाय मदारी।
कह दे राजदुलारी तेरी, आएगी कब बारी।
मटरू भौं-भौं करता सोया, जो दिन-दिन भर भागे।।

लोरी के झूले में आ कर, पेंगें ले ले ओ री!
सुंदर-सुंदर सपनों से तू,भर ले आँखें कोरी।
ओ बातूनी बातों से तू, करती मन की चोरी।
आँखों के पत्ते पर ढेले, सपनों के रख छोरी।
नींद भरे रसगुल्ले मैया, देखो गुड़ में पागे।

आ जा पलकों पर मैं रख दूँ, एक कहानी तेरी।
कैसे ठिगना बौना तोड़े, ऊँची-ऊँची बेरी।
कैसे राजकुमारी कहती, यह बेरी है मेरी।
कैसे घबराती थी वह जब, आती रात घनेरी।
जादूगर रहता था कोई, जंगल के बस आगे।।

मेहा मिश्रा
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खा ले बिटिया,खा ले बिटिया
रबड़ी खीर मलाई।
अम्मा पीछे-पीछे दौड़े
लेकर बाल-मिठाई।।

छज्जे पर अखरोट मजे से,
रोज गिलहरी खाती।
गौरैया गेहूँ की बाली, 
नित्य खेत से लाती।
तू भी खाले बिटिया रानी,
लड्डू पेड़े  लाई।।

रट्टू तोता दिन-भर खाए,
मिर्ची मोटी-मोटी।
कौवा छत पर जा कर खाता,
मक्के की दो रोटी।
तू भी माखन खा ले जैसे,
खाते कृष्ण-कन्हाई।।

गैया चर कर पगुराती है,
बछड़ा खाए भूसा।
तितली ने खिलती कलियों का,
फूलों का रस चूसा।
हलवा-पूड़ी खा ले बिट्टो,
अम्मा ले कर आई।

मेहा मिश्रा
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